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कुछ पीएम सूर्य घर आवेदन क्यों अटक जाते हैं, और इससे कैसे बचें
एक अध्ययन में पाया गया कि पीएम सूर्य घर के एक-चौथाई से भी कम आवेदन इंस्टॉलेशन तक पहुँचे। जानें आम देरी के कारण और उनसे कैसे बचें।

पीएम सूर्य घर ने लाखों परिवारों के लिए रूफटॉप सोलर को किफ़ायती बना दिया है, लेकिन हर आवेदन आसानी से इंस्टॉलेशन तक नहीं पहुँचता। IEEFA के दिसंबर 2025 के एक विश्लेषण में पाया गया कि उस समय तक केवल लगभग 22.7% आवेदन ही पूरे हुए इंस्टॉलेशन में बदले थे।
आवेदन कहाँ धीमे पड़ जाते हैं
मंज़ूरी और नेट मीटर: योजना का लक्ष्य 30 दिनों में मंज़ूरी देना है, लेकिन अध्ययन में वास्तविक समय 45 से 120 दिन पाया गया, जिसका कारण अक्सर मीटर की कमी और वेंडरों व डिस्कॉम के बीच ख़राब तालमेल होता है।
फ़ाइनेंसिंग: सरकारी बैंकों के लोन की ब्याज दर लगभग 7 से 8% होती है लेकिन प्रक्रिया धीमी हो सकती है, जबकि तेज़ NBFC लोन 10 से 14% पर मिलते हैं।
पैनल की आपूर्ति: सब्सिडी वाले सिस्टम में घरेलू रूप से बने (DCR) पैनल इस्तेमाल करना ज़रूरी है, जो महंगे होते हैं और कभी-कभी कम उपलब्ध होते हैं।
पोर्टल और वेंडर से जुड़ी समस्याएँ: पोर्टल पर त्रुटियाँ और इंस्टॉलेशन की असमान गुणवत्ता सब्सिडी में देरी करती हैं और भरोसे को नुकसान पहुँचाती हैं।
अटकने से कैसे बचें
एक अनुभवी, पंजीकृत वेंडर चुनें जो पहली बार में ही सही तरीके से आवेदन दाखिल करे।
अपने दस्तावेज़ तैयार रखें: बिजली बिल, आधार, बैंक विवरण और स्वामित्व का प्रमाण।
अपने इंस्टॉलर से पूछें कि वे मंज़ूरी और नेट मीटर के लिए डिस्कॉम से कैसे फ़ॉलो-अप करते हैं।
पुष्टि करें कि कोटेशन में दिए गए पैनल DCR-स्वीकृत हैं, ताकि आपकी सब्सिडी अस्वीकार न हो।
प्रक्रिया हमें संभालने दें
Greenshine Solar ने उत्तर प्रदेश में हज़ारों पीएम सूर्य घर आवेदन दाखिल किए हैं। हम पोर्टल, डिस्कॉम मंज़ूरी और नेट मीटरिंग का प्रबंधन करते हैं, और हर कदम पर आपको अपडेट रखते हैं। शुरू करने के लिए मुफ़्त परामर्श बुक करें।





